कोहरा बिहार में सबसे लगातार और बाधा उत्पन्न करने वाली मौसमीय घटनाओं में से एक है, विशेषकर दिसंबर से फरवरी के शीतकालीन महीनों के दौरान। जब भूमि के निकट की हवा अपने ओसांक (Dew Point) तक ठंडी हो जाती है, तब वायुमंडल में मौजूद जलवाष्प सूक्ष्म बूंदों में संघनित हो जाती है, जो हवा में निलंबित रहकर दृश्यता को कम कर देती हैं। आर्द्र जलवायु, गंगा बेसिन की निकटता और शीत ऋतु में बार-बार होने वाली तापमान उलटना (Temperature Inversion) के कारण बिहार में घने कोहरे की घटनाएँ सामान्य हैं।
1. बिहार में कोहरे के कारण
- तापमान उलटना (Temperature Inversion): सर्द रातों में भूमि के पास ठंडी हवा ऊपर की गर्म हवा के नीचे फँस जाती है, जिससे कोहरे का निर्माण होता है।
- उच्च आर्द्रता: नदियों, तालाबों और कृषि क्षेत्रों से आने वाली नमी संघनन की प्रक्रिया को बढ़ाती है।
- शांत हवाएँ: हल्की या शांत हवाएँ वायु मिश्रण को रोकती हैं, जिससे कोहरा लंबे समय तक बना रहता है।
- भौगोलिक कारक: इंडो-गंगा के मैदानी क्षेत्रों के निचले इलाके लंबे समय तक कोहरे की चपेट में रहते हैं।
2. बिहार में सामान्य कोहरे के प्रकार
- रेडिएशन फॉग: साफ शीतकालीन रातों में भूमि के तेजी से ठंडा होने के कारण बनता है।
- एडवेक्शन फॉग: जब नम हवा किसी ठंडी सतह के ऊपर से गुजरती है, विशेषकर नदी किनारे, तब बनता है।
- घना कोहरा: उत्तर बिहार में आम, जहाँ दृश्यता 50 मीटर से भी कम हो जाती है।
3. कोहरे के प्रभाव
- परिवहन क्षेत्र: घना कोहरा बिहार में सड़क और रेल दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में से एक है। खराब दृश्यता के कारण सड़क यातायात बाधित होता है, ट्रेनों में देरी होती है और पटना व गया हवाई अड्डों पर उड़ानें रद्द करनी पड़ती हैं।
- स्वास्थ्य: लंबे समय तक कोहरे के संपर्क में रहने से श्वसन संबंधी समस्याएँ, दमा और वायरल संक्रमण बढ़ते हैं। कोहरे के साथ प्रायः शीत लहर की स्थिति भी होती है, जिससे संवेदनशील वर्गों के लिए स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाता है।
- कृषि: कोहरा सूर्य के प्रकाश को कम कर देता है, जिससे गेहूँ और सरसों जैसी रबी फसलों की वृद्धि धीमी हो जाती है। साथ ही फफूंद और कीट प्रकोप का खतरा बढ़ता है।
- दैनिक जीवन: लंबे समय तक सुबह के कोहरे के कारण स्कूलों, कार्यालयों और दैनिक गतिविधियों में व्यवधान उत्पन्न होता है।
4. ऐतिहासिक कोहरा घटनाएँ
प्रत्येक शीत ऋतु में बिहार में घने कोहरे की लंबी अवधि देखने को मिलती है। कुछ वर्षों में पटना हवाई अड्डे पर दृश्यता कई दिनों तक 100 मीटर से नीचे रही है, जिससे हवाई यातायात ठप हो गया। इसी प्रकार, राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर कोहरे के चरम समय में दुर्घटनाएँ आम हो जाती हैं।
5. कोहरा निगरानी एवं पूर्वानुमान में BMSK की भूमिका
बिहार मौसम सेवा केंद्र (BMSK) वैज्ञानिक कोहरा पूर्वानुमान प्रदान करने में अग्रणी भूमिका निभाता है:
- AWS/ARG नेटवर्क: 8,300 से अधिक ARG और 535 AWS के माध्यम से तापमान, आर्द्रता और दृश्यता का मापन।
- WRF मॉडल पूर्वानुमान: उच्च-रिज़ॉल्यूशन मॉडल तापमान उलटना पैटर्न को पकड़कर कोहरे के निर्माण का पूर्वानुमान करते हैं।
- विशेषीकृत कोहरा पूर्वानुमान मॉडल: अमेरिका के नेशनल सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक रिसर्च (NCAR) के सहयोग से विकसित यह मॉडल बिहार की जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप है और जिला व ब्लॉक स्तर पर कोहरे की शुरुआत, अवधि और समाप्ति का सटीक पूर्वानुमान प्रदान करता है।
- नाउकास्टिंग (0–3 घंटे): उपग्रह और स्थलीय आंकड़ों के आधार पर कोहरे की तात्कालिक चेतावनियाँ।
- प्रभाव-आधारित परामर्श: परिवहन सुरक्षा, स्वास्थ्य सावधानियों और कृषि सलाह से जुड़े पूर्वानुमान।
6. संचार एवं जनसंपर्क
BMSK यह सुनिश्चित करता है कि कोहरे संबंधी चेतावनियाँ अंतिम छोर तक पहुँचें:
- “मुजफ्फरपुर में कल सुबह घना कोहरा संभावित – सुबह 9 बजे से पहले अनावश्यक यात्रा से बचें” जैसे SMS अलर्ट।
- यातायात प्रबंधन हेतु परिवहन प्राधिकरणों के साथ समन्वय।
- रबी फसलों को ठंड और कोहरे से बचाने हेतु किसानों के लिए परामर्श।
- डैशबोर्ड, मोबाइल ऐप और मेघ मित्र हेल्पलाइन के माध्यम से सार्वजनिक बुलेटिन।
7. दीर्घकालिक तैयारी एवं जलवायु अंतर्दृष्टि
2021 से BMSK के डेटा और NCAR सहयोग का उपयोग निम्नलिखित के लिए किया जा रहा है:
- अधिक कोहरा-प्रवण जिलों की पहचान।
- मौसमी कोहरा प्रबंधन में विमानन और परिवहन एजेंसियों का सहयोग।
- कोहरे की तीव्रता और अवधि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर शोध।
- कोहरा-प्रवण महीनों में सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों का मार्गदर्शन।
निष्कर्ष
यद्यपि कोहरा बाढ़ या सूखे जितना विनाशकारी नहीं है, फिर भी यह बिहार में परिवहन, स्वास्थ्य और कृषि के लिए सबसे अधिक बाधा उत्पन्न करने वाली आपदाओं में से एक है। वास्तविक समय के ARG/AWS डेटा, WRF आधारित पूर्वानुमान और NCAR समर्थित कोहरा पूर्वानुमान मॉडल के माध्यम से बिहार मौसम सेवा केंद्र उन्नत, विश्वसनीय और समय पर चेतावनियाँ प्रदान करता है। प्रभावी अंतिम-छोर संचार सुनिश्चित कर BMSK दुर्घटनाओं को कम करने, फसलों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, जिससे बिहार इस आवर्ती शीतकालीन जोखिम के प्रति अधिक सहनशील बन रहा है।