बिहार मौसम सेवा केंद्र
योजना एवं विकास विभाग, बिहार सरकार
अवलोकन ग्रीष्म लहर आंधी और बिजली तेज़ हवाएँ / झक्कड़ ओलावृष्टि भारी वर्षा / अत्यधिक वर्षा बाढ़ सूखा शीत लहर घना कोहरा

ओलावृष्टि बिहार में होने वाली स्थानीय लेकिन अत्यंत विनाशकारी मौसमीय घटनाओं में से एक है, जो मुख्यतः पूर्व-मानसून (मार्च–मई) और उत्तर-मानसून (अक्टूबर–नवंबर) अवधि के दौरान होती है। यह तीव्र संवहनीय गतिविधियों (Convective Activity) के कारण गरज-चमक वाले तूफानों के भीतर उत्पन्न होती है, जहाँ शक्तिशाली ऊर्ध्वगामी हवाएँ (Updrafts) वर्षा बूंदों को वायुमंडल की अत्यधिक ठंडी परतों तक ले जाती हैं और उन्हें ओलों में परिवर्तित कर देती हैं। ये बर्फीले कण, जिनका आकार कुछ मिलीमीटर से लेकर कई सेंटीमीटर तक हो सकता है, भारी वेग के साथ भूमि पर गिरते हैं और व्यापक क्षति पहुँचाते हैं।


1. बिहार में ओलावृष्टि के कारण

  1. तीव्र संवहनीय गतिविधि: ग्रीष्म ऋतु में भूमि के तीव्र गर्म होने से वायुमंडलीय अस्थिरता बढ़ती है, जिससे गरज-चमक वाले तूफानों का विकास होता है।
  2. नमी की आपूर्ति: बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी युक्त हवाएँ तूफानी बादलों को ऊर्जा प्रदान करती हैं।
  3. ऊर्ध्वाधर पवन कतरन (Vertical Wind Shear): ऊँचाई के साथ हवा की गति और दिशा में अंतर बड़े ओला-उत्पादक बादलों को बनाए रखने में सहायक होता है।
  4. जलवायु परिवर्तनशीलता: तापमान और पवन पैटर्न में हो रहे बदलावों से गंभीर संवहनीय तूफानों की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ी है।


2. ओलावृष्टि के प्रभाव

  1. कृषि: ओलावृष्टि बिहार की कृषि के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक है, विशेषकर रबी मौसम के दौरान। गेहूँ, मक्का, मसूर और सब्ज़ियों जैसी खड़ी फसलें कुछ ही मिनटों में नष्ट हो जाती हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान होता है।
  2. अवसंरचना: बड़े ओलों से छतें, खिड़कियाँ, वाहन और विद्युत लाइनें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।
  3. पशुधन एवं जनहानि: खुले खेतों में चर रहे पशु और बाहर मौजूद लोग गंभीर चोट या मृत्यु के जोखिम में रहते हैं।
  4. अर्थव्यवस्था: फसलों और संपत्ति की क्षति का सीधा प्रभाव ग्रामीण आय और राज्य के कृषि उत्पादन पर पड़ता है।


3. ऐतिहासिक ओलावृष्टि घटनाएँ

नालंदा, नवादा, गया, औरंगाबाद और रोहतास सहित बिहार के कई जिलों में बार-बार गंभीर ओलावृष्टि की घटनाएँ दर्ज की गई हैं। कुछ वर्षों में हजारों हेक्टेयर में खड़ी फसलें नष्ट हो गईं, जिसके कारण सरकार को मुआवज़ा योजनाएँ लागू करनी पड़ीं। ये घटनाएँ समय पर चेतावनी और तैयारी की अत्यंत आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।


4. ओलावृष्टि निगरानी एवं पूर्वानुमान में BMSK की भूमिका

बिहार मौसम सेवा केंद्र (BMSK) ओलावृष्टि जोखिम को कम करने हेतु वैज्ञानिक उपकरण प्रदान करता है:

  1. AWS/ARG नेटवर्क: संवहनीय गतिविधियों से जुड़े तापमान, आर्द्रता और पवन में तीव्र परिवर्तनों का पता लगाता है।
  2. WRF मॉडल पूर्वानुमान: उच्च-रिज़ॉल्यूशन मॉडल ब्लॉक स्तर पर गरज-चमक और ओलावृष्टि की संभावना का पूर्वानुमान करते हैं।
  3. नाउकास्टिंग (0–3 घंटे): रडार डेटा (IMD के सहयोग से) और उपग्रह इनपुट का उपयोग कर तात्कालिक ओलावृष्टि चेतावनियाँ जारी की जाती हैं।
  4. प्रभाव-आधारित परामर्श: फसल कैलेंडर से जुड़े पूर्वानुमानों के आधार पर किसानों को नर्सरी ढकने, समय से पहले कटाई करने या पशुधन को सुरक्षित करने जैसे उपाय सुझाए जाते हैं।


5. संचार एवं जनसंपर्क

BMSK यह सुनिश्चित करता है कि ओलावृष्टि चेतावनियाँ समुदाय तक शीघ्र पहुँचें:

  1. “नालंदा में 3–5 बजे के बीच ओलावृष्टि की संभावना – खड़ी गेहूँ की फसलों की सुरक्षा करें” जैसे SMS अलर्ट।
  2. कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसान परामर्श।
  3. स्थानीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों को सूचित कर संवेदनशील आबादी के लिए सुरक्षा उपाय।


6. दीर्घकालिक तैयारी एवं जलवायु सहनशीलता

2021 से BMSK के ओलावृष्टि संबंधी डेटा का उपयोग निम्नलिखित के लिए किया जा रहा है:

  1. ओलावृष्टि-प्रवण ब्लॉकों और जिलों की पहचान।
  2. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) जैसी फसल बीमा योजनाओं को सत्यापित मौसम डेटा प्रदान करना।
  3. ओला-जाल (Hail Nets) और फसल विविधीकरण जैसी जलवायु-सहनीय कृषि पद्धतियों का विकास।
  4. बिहार में गंभीर संवहनीय तूफानों और जलवायु परिवर्तन के बीच संबंधों पर शोध।


निष्कर्ष

यद्यपि ओलावृष्टि स्थानीय स्तर पर होती है, फिर भी यह बिहार में कृषि, अवसंरचना और आजीविका को अचानक और गंभीर क्षति पहुँचाती है। वास्तविक समय के AWS/ARG डेटा, WRF आधारित पूर्वानुमान और नाउकास्टिंग सहायता के माध्यम से बिहार मौसम सेवा केंद्र समय पर चेतावनी और तैयारी को सक्षम बनाता है। मौसम विज्ञान और किसान-परामर्श के बीच की दूरी को पाटकर BMSK ओलावृष्टि के जोखिम को कम करने और बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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